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फेड दर वृद्धि अनिश्चितता: अर्थशास्त्री 36% संभावना के दांव को चुनौती देते हैं
कथित तौर पर 104 अर्थशास्त्रियों का एक महत्वपूर्ण समूह बाजार की उन अपेक्षाओं से असहमत है जो आगामी अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दर वृद्धि की 36% संभावना का सुझाव देती हैं। दृष्टिकोण में यह भिन्नता वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता को उजागर करती है, जिसके भारतीय बाजारों, विदेशी निवेश और रुपये के मूल्य के लिए संभावित दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं।

अमेरिकी फेड का आक्रामक रुख: भारतीय बाजारों और आपके निवेश पर इसका क्या असर होगा
अमेरिकी फेडरल रिजर्व का बढ़ता आक्रामक रुख, जो लंबे समय तक संभावित रूप से ऊंची ब्याज दरों का संकेत देता है, भारतीय वित्तीय बाजारों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। इस वैश्विक मौद्रिक नीति में बदलाव से विदेशी निवेश की निकासी हो सकती है, भारतीय रुपये पर मूल्यह्रास का दबाव पड़ सकता है और भारतीय रिजर्व बैंक के नीतिगत फैसलों पर असर पड़ सकता है।
FIIs का बदलता रुख: विदेशी निवेशक दिग्गजों से मिड-कैप की ओर अरबों डॉलर कर रहे हैं ट्रांसफर
विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से बाहर नहीं निकल रहे हैं, बल्कि वे अपने पोर्टफोलियो में फेरबदल कर रहे हैं। अरबों डॉलर की राशि पारंपरिक लार्ज-कैप शेयरों से हटाकर उच्च-विकास वाली मिड-कैप कंपनियों की ओर स्थानांतरित की जा रही है।
US-Iran शांति की पहल से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट; भारतीय शेयरों में फिर से बढ़ सकती है दिलचस्पी
अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित शांति ढांचे से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें नीचे आ रही हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिल रही है। यह भू-राजनीतिक बदलाव विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार में लौटने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है क्योंकि मुद्रास्फीति का दबाव कम होने लगा है।
एक युग का अंत: दिग्गज संस्थागत ब्रोकरेज CLSA अब Citic Securities के नाम से जानी जाएगी
प्रतिष्ठित 40 साल पुराना ब्रोकरेज ब्रांड CLSA 2027 तक चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर दिया जाएगा, क्योंकि इसकी मूल कंपनी Citic Securities फर्म के पूर्ण एकीकरण की ओर बढ़ रही है। यह बदलाव उस ब्रांड के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है जो लंबे समय से भारतीय शेयर बाजारों में विदेशी पूंजी प्रवाह का एक प्रमुख प्रभावशाली कारक रहा है।
US Tech मार्केट में गिरावट जारी: भारतीय IT निवेशकों को क्यों सतर्क रहना चाहिए
प्रमुख अमेरिकी सूचकांक, जिनमें Nasdaq भी शामिल है, महत्वपूर्ण मुद्रास्फीति डेटा से पहले टेक-आधारित बिकवाली के कारण भारी गिरावट का सामना कर रहे हैं। वॉल स्ट्रीट में इस गिरावट का असर भारतीय IT शेयरों पर पड़ने और घरेलू बाजारों में विदेशी फंड प्रवाह को प्रभावित करने की संभावना है।
भारतीय निवेशकों का बढ़ता दबदबा: विदेशी फंड्स की निकासी के बीच DIIs ने ₹4.16 लाख करोड़ का निवेश किया
घरेलू संस्थागत निवेशक दलाल स्ट्रीट की रीढ़ बन गए हैं, जिन्होंने विदेशी फंडों की भारी बिकवाली के बावजूद 2026 में ₹4 लाख करोड़ से अधिक का निवेश किया है। यह बदलाव दर्शाता है कि रिटेल भागीदारी से प्रेरित घरेलू बचत अब भारतीय बाजार को वैश्विक अस्थिरता से बचाने के लिए पर्याप्त मजबूत है।
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