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वैश्विक घटनाओं पर नज़र: अमेरिकी फेड, महंगाई और बिग टेक इस सप्ताह भारतीय बाजारों को प्रभावित करेंगे
इस सप्ताह प्रमुख वैश्विक आर्थिक घटनाएँ, जिनमें यूएस फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक, प्रमुख अमेरिकी महंगाई के आँकड़े, और प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों की आय रिपोर्ट शामिल हैं, भारतीय शेयर बाजार में भावना और विदेशी निवेश प्रवाह को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करने की उम्मीद है। भारतीय निवेशकों को इन घटनाक्रमों पर बारीकी से नज़र रखनी चाहिए क्योंकि ये एफआईआई गतिविधि और रुपये के प्रदर्शन पर असर डाल सकते हैं।
US Fed अध्यक्ष केविन वॉर्श की पहली पॉलिसी परीक्षा: भारतीय निवेशकों को क्यों रखनी चाहिए नज़र
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नए अध्यक्ष केविन वॉर्श उच्च मुद्रास्फीति और बाजार की अनिश्चितता के बीच अपनी पहली बड़ी नीतिगत बैठक की तैयारी कर रहे हैं। ब्याज दरों पर उनके रुख से भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) प्रवाह की दिशा तय होने की उम्मीद है।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 94.71 पर पहुंचा: जानें क्यों आपकी विदेश यात्रा अब और महंगी हो गई है
शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 21 पैसे गिरकर 94.71 पर पहुंच गया, जिसका मुख्य कारण मजबूत डॉलर और अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें हैं। इस बदलाव से भारतीय उपभोक्ताओं के लिए अंतरराष्ट्रीय शिक्षा, विदेश में छुट्टियां मनाना और आयातित इलेक्ट्रॉनिक्स महंगे होने की संभावना है।
US Fed Policy Meeting: ब्याज दरों में कोई बदलाव न होने पर भारतीय रिटेल निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा अपनी नवीनतम नीति बैठक में ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने की उम्मीद है, जो नए अध्यक्ष केविन वारश के नेतृत्व में पहली बैठक है। भारतीय निवेशकों के लिए, ध्यान इस बात पर है कि फेड का रुख रुपये और घरेलू बाजारों में विदेशी निवेश के प्रवाह को कैसे प्रभावित करेगा।
US Fed का नया 'मौन दृष्टिकोण' भारतीय निवेशकों के लिए बढ़ा सकता है बाजार का उतार-चढ़ाव
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों पर पहले से स्पष्ट संकेत देने की नीति को छोड़ने से वैश्विक अनिश्चितता पैदा हो रही है। नए फेड अध्यक्ष केविन वार्श (Kevin Warsh) के इस कदम से भारतीय शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव आ सकता है और स्थानीय ब्याज दरों में कटौती में देरी हो सकती है।
US Fed ने ब्याज दरों को 3.5%-3.75% पर स्थिर रखा, मुद्रास्फीति की चिंताएं बरकरार
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी हालिया बैठक में ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखा है, लेकिन संकेत दिया है कि भविष्य में और बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। यह निर्णय तब लिया गया है जब नीति निर्माता उच्च ऊर्जा कीमतों से जुड़े बढ़ते मुद्रास्फीति जोखिमों के बीच मजबूत घरेलू विकास का आकलन कर रहे हैं।
बैंकिंग शेयरों के नेतृत्व में भारतीय शेयर बाजार लगातार 5वें दिन चढ़े: क्या यह खरीदने का समय है या इंतज़ार करने का?
बैंकिंग शेयरों के दमदार प्रदर्शन के दम पर भारतीय बाजारों ने अपनी जीत का सिलसिला लगातार पांचवें दिन भी जारी रखा। अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों को ऊंचा रखने के संकेतों के बावजूद, स्थानीय निवेशकों का उत्साह सकारात्मक बना हुआ है, हालांकि विशेषज्ञों ने रैली में संभावित सुस्ती की चेतावनी दी है।
US Fed के रुख के बीच Bitcoin की रिकवरी ₹53.4 लाख के पास थमी
बिटकॉइन द्वारा अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिशों में तब रुकावट आ गई जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को लेकर सतर्क रुख अपनाने का संकेत दिया। संस्थागत खरीदारी की कमी और क्रिप्टो फंड से निकासी (outflows) ने कीमतों को ₹53.4 लाख के स्तर के आसपास अटका दिया है।
IT शेयरों में गिरावट: क्यों अमेरिकी ब्याज दरों के डर ने TCS, Infosys और Wipro को हिला दिया है
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी के संकेत देने के बाद प्रमुख भारतीय IT कंपनियों के शेयरों में 3% तक की गिरावट आई। इससे यह चिंता बढ़ गई है कि उत्तरी अमेरिकी ग्राहक टेक्नोलॉजी खर्च में कटौती करेंगे, जिसका सीधा असर भारतीय टेक राजस्व पर पड़ेगा।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व का 'हायर फॉर लॉन्गर' रुख: भारतीय ब्याज दरों में कटौती और FPI प्रवाह में देरी क्यों?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को उच्च स्तर पर बनाए रखने के फैसले से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अपनी ब्याज दर कटौती में देरी होने की उम्मीद है। चूंकि वैश्विक पूंजी अमेरिकी टेक बूम की ओर आकर्षित बनी हुई है, इसलिए भारतीय बाजारों में विदेशी फंड प्रवाह (FPI inflows) में मंदी देखी जा सकती है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने दिया नीति में बड़े बदलाव का संकेत: भारतीय निवेशकों को क्यों रहना चाहिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी के लिए तैयार
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के संचार (communication) में एक महत्वपूर्ण बदलाव महंगाई के जिद्दी बने रहने के कारण ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी का संकेत देता है। यह कदम भारत से विदेशी फंडों की निकासी को गति दे सकता है और स्थानीय खुदरा निवेशकों के पास मौजूद अमेरिका-केंद्रित म्यूचुअल फंडों के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने लंबे समय तक उच्च ब्याज दरों के संकेत दिए: भारतीय EMI और डेट म्यूचुअल फंड पर प्रभाव
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के मुद्रास्फीति (inflation) पर सतर्क रुख का मतलब है कि भारत में ब्याज दरों में जल्द गिरावट आने की संभावना कम है। यह देरी उन होम लोन ग्राहकों के लिए EMI राहत को टालती है और डेट म्यूचुअल फंड में त्वरित लाभ की तलाश कर रहे निवेशकों को प्रभावित करती है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व का संकेत: लंबे समय तक ऊंची रहेंगी दरें; भारतीय निवेशक रहें उतार-चढ़ाव के लिए तैयार
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने संकेत दिया है कि जिद्दी मुद्रास्फीति (sticky inflation) के कारण ब्याज दरें लंबी अवधि तक ऊंची बनी रहेंगी। इस 'हॉकिश' (सख्त) रुख से भारत से विदेशी फंडों की निकासी शुरू होने की संभावना है और इससे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा स्थानीय ब्याज दरों में कटौती की योजनाओं में देरी हो सकती है।
सोना ₹1,600 लुढ़का, चांदी ₹6,300 टूटी: अब क्या करें भारतीय निवेशक?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा इस साल के अंत में ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी के संकेत देने के बाद MCX पर कीमती धातुओं की कीमतों में बड़ी गिरावट देखी गई। जहां सोना ₹1,600 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹6,300 प्रति किलोग्राम तक गिर गई, वहीं विश्लेषकों का मानना है कि यह मुनाफावसूली (profit booking) का एक अवसर है और नए निवेशकों को बेहतर एंट्री लेवल का इंतजार करना चाहिए।
अमेरिकी बाजारों में 1% से अधिक की गिरावट, फेड ब्याज दर बढ़ने के डर से; भारतीय निवेशक निकासी (Outflows) के लिए तैयार
फेडरल रिजर्व द्वारा मुद्रास्फीति (inflation) से लड़ने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेत देने के बाद प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों में भारी गिरावट आई। इस 'हॉकिश' (कड़े) रुख से भारत में विदेशी निवेशकों द्वारा बिकवाली की आशंका है और इससे रुपये पर नया दबाव पड़ सकता है।
US Fed के नेतृत्व में बदलाव: क्यों केविन वारश का संभावित पदार्पण भारतीय बाजारों के लिए महत्वपूर्ण है
जैसे-जैसे केविन वारश अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष के लिए एक प्रमुख उम्मीदवार के रूप में उभर रहे हैं, ब्याज दरों के प्रति उनका दृष्टिकोण वैश्विक बाजारों की दिशा तय करेगा। भारतीय निवेशकों को इस बदलाव पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यह सीधे तौर पर विदेशी फंड प्रवाह और रुपये के मूल्य को प्रभावित करता है।
US ब्याज दर में बढ़ोतरी के कयास बरकरार: भारतीय होम लोन और FII प्रवाह के लिए इसके क्या मायने हैं
अमेरिकी मुद्रास्फीति (इन्फ्लेशन) में मामूली गिरावट दिखाने वाले हालिया आंकड़ों के बावजूद, वैश्विक बॉन्ड ट्रेडर्स अभी भी 2026 के अंत तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं। भारतीय निवेशकों के लिए, यह वैश्विक रुझान प्रभावित करता है कि RBI घरेलू ब्याज दरें कैसे तय करता है और हमारे शेयर बाजारों में कितना विदेशी पैसा आता है।
Bitcoin फिर से $63,000 के पार; विशेषज्ञों ने भारतीय रिटेल निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दी
भारी गिरावट के बाद Bitcoin ने वापसी करते हुए $63,000 (लगभग ₹52.8 लाख) का स्तर पार कर लिया है। जहां संस्थागत खरीदारी और ETF इनफ्लो इस उछाल को बढ़ावा दे रहे हैं, वहीं आगामी अमेरिकी आर्थिक डेटा और केंद्रीय बैंक के फैसले बाजार के दृष्टिकोण को अस्थिर बनाए हुए हैं।
US Fed की दरें 2027 तक रह सकती हैं ऊंची: आपकी EMI और शेयरों के लिए इसके क्या हैं मायने
अमेरिका में उम्मीद से अधिक मजबूत रोजगार वृद्धि के बाद गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती के अपने अनुमान को 2027 तक टाल दिया है। इस 'हायर-फॉर-लॉन्गर' (लंबे समय तक ऊंची दरें) रुख से भारतीय शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव बने रहने और RBI द्वारा ब्याज दरें कम करने की योजनाओं में देरी होने की संभावना है।
ग्लोबल टेक सेल-ऑफ: अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका से सेमीकंडक्टर और IT शेयरों में गिरावट
अमेरिकी बाजारों में अचानक आई गिरावट ने वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर शेयरों में बिकवाली शुरू कर दी है। भारतीय रिटेल निवेशकों को स्थानीय IT शेयरों और इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड्स पर इसके प्रभाव के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि AI पर लगे बड़े दांव अब वास्तविकता की कसौटी पर हैं।
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