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NaBFID को बुनियादी ढांचे के लिए जीरो-कूपन बॉन्ड के जरिए ₹20,000 करोड़ जुटाने की मिली हरी झंडी
नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट (NaBFID) को सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) से ₹20,000 करोड़ के जीरो-कूपन बॉन्ड जारी करने की मंजूरी मिल गई है। ये बॉन्ड 10 साल में परिपक्व होंगे, और NaBFID को पूरे भारत में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक पूंजी सुरक्षित करने में मदद करेंगे।
गोल्डमैन सैक्स ने प्रतिफल में अपेक्षित गिरावट पर भारत के 30-वर्षीय सरकारी बॉन्ड का समर्थन किया
वैश्विक वित्तीय दिग्गज गोल्डमैन सैक्स भारत के 30-वर्षीय सरकारी बॉन्ड खरीदने की सलाह देता है, उनके ब्याज दरों (प्रतिफल) में गिरावट की उम्मीद करते हुए। यह दृष्टिकोण विदेशी निवेशकों की बढ़ती पहुंच और भारतीय परिवारों में दीर्घकालिक वित्तीय उत्पादों में बचत करने की बढ़ती प्रवृत्ति से प्रेरित है। प्रतिफल में गिरावट का आम तौर पर मतलब है कि बॉन्ड की कीमतों में वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे संभावित रूप से आकर्षक प्रतिफल मिल सकता है।
आरबीआई का कड़ा रुख: ब्याज दरों पर बेहतर नियंत्रण के लिए सरकारी बॉन्ड भारतीय सरजमीं पर ही रहेंगे
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी निवेशकों को यूरोक्लियर (Euroclear) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय सरकारी बॉन्ड ट्रेड करने की अनुमति देने की योजनाओं को खारिज कर दिया है। ट्रेडिंग को घरेलू स्तर पर रखकर, केंद्रीय बैंक का लक्ष्य उन ब्याज दरों पर कड़ा नियंत्रण बनाए रखना है जो आपके लोन और जमा (deposits) को प्रभावित करती हैं।
भारतीय सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेशकों की भारी दिलचस्पी: जानें यह आपके डेट फंड रिटर्न को कैसे बढ़ा सकता है
अनुकूल कर नियमों और स्थिर रुपये के कारण भारत की सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में रिकॉर्ड विदेशी पूंजी आ रही है। यह रुझान बढ़ते वैश्विक विश्वास का संकेत है, जिससे ब्याज दरों में कमी और घरेलू डेट फंड निवेशकों के लिए बेहतर लाभ हो सकता है।
अमेरिकी फेड के फैसले और तेल की कीमतों पर निवेशकों की नजर, भारतीय बॉन्ड मार्केट में ठहराव
भारतीय सरकारी बॉन्ड में हालिया तेजी थम गई है क्योंकि निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति घोषणा से पहले सतर्क हो गए हैं। स्थिर होती वैश्विक तेल की कीमतें और विदेशी निवेश के रुझानों में संभावित बदलाव के कारण बेंचमार्क 10-वर्षीय यील्ड (yield) अब 12-सप्ताह के निचले स्तर के करीब बनी हुई है।
RBI के डेट मार्केट सुधारों से आ सकता है $100 बिलियन का विदेशी निवेश: Invesco MF
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए निवेश नियमों को आसान बनाने के निर्णय से सरकारी बॉन्ड में वैश्विक पूंजी की एक बड़ी लहर आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से रुपये में स्थिरता आएगी और भारतीय उपभोक्ताओं व व्यवसायों के लिए ऋण लागत कम हो सकती है।
रुपये और बॉन्ड बाजार को मजबूती देने के लिए सरकार ने विदेशी निवेशकों के लिए नियमों को किया सरल
भारत सरकार ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए देश में अधिक वैश्विक पूंजी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक सरलीकृत आवेदन प्रक्रिया शुरू की है। इस नियामक बदलाव का लक्ष्य रुपये को स्थिर करना है और अंततः इससे घरेलू खुदरा उधारकर्ताओं और बचतकर्ताओं के लिए बेहतर ब्याज दरें मिल सकती हैं।
वैश्विक तेल कीमतों में गिरावट से भारतीय बॉन्ड्स में तेजी; बाजार की नजर नए ऋण नीलामी (Debt Auction) पर
गुरुवार को सरकारी बॉन्ड की कीमतों में वृद्धि हुई क्योंकि वैश्विक तेल कीमतों में गिरावट ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मुद्रास्फीति (inflation) की चिंताओं को कम कर दिया है। विदेशी निवेश को आकर्षित करने और रुपये को स्थिर करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सक्रिय कदमों ने ऋण बाजार को और समर्थन दिया है।
मिडल ईस्ट में तनाव से भारतीय बॉन्ड रैली पर लगी रोक, तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों को डराया
इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक तेल की कीमतों में उछाल आने से बुधवार को भारतीय सरकारी बॉन्डों की चार दिनों की बढ़त का सिलसिला थम गया। घरेलू निवेशकों ने इस डर के बीच प्रॉफिट-बुकिंग की ओर रुख किया कि महंगे ईंधन से स्थानीय मुद्रास्फीति (inflation) बढ़ जाएगी।
RBI के उपायों से लिक्विडिटी बढ़ने के कारण शॉर्ट-टर्म बॉन्ड यील्ड 3 महीने के निचले स्तर पर
डॉलर की आवक (inflows) बढ़ाने के लिए RBI के हालिया उपायों के बाद शॉर्ट-टर्म भारतीय सरकारी बॉन्ड यील्ड गिरकर तीन महीने के निचले स्तर पर आ गई है। यह बदलाव बैंकों के लिए उधारी लागत में संभावित कमी का संकेत देता है, जो अंततः रिटेल ब्याज दरों को प्रभावित कर सकता है।
टैक्स राहत के बाद भारतीय बॉन्ड में विदेशी निवेश ₹8,795 करोड़ बढ़ा
टैक्स में महत्वपूर्ण छूट मिलने के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में अपनी हिस्सेदारी काफी बढ़ा दी है। 'फुल्ली एक्सेसिबल रूट' (FAR) के तहत पूंजी के इस प्रवाह से रुपये को मजबूती मिलने और घरेलू ऋण बाजार में लिक्विडिटी में सुधार होने की उम्मीद है।
RBI के कदमों और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बाजार धारणा मजबूत, बॉन्ड यील्ड में कमी
भारतीय सरकारी बॉन्ड में मंगलवार को खरीदारी की गतिविधियों में तेजी देखी गई, जिसका मुख्य कारण भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के प्रयास और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की गिरती कीमतें रहीं। ये घटनाक्रम डेट म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण और लंबी अवधि में कर्जदारों के लिए संभावित राहत का संकेत देते हैं।
भारत की नजर वैश्विक बॉन्ड इंडेक्स में शामिल होने पर: इस कदम से ब्याज दरों में कमी और रुपये को मिल सकती है मजबूती
विदेशी निवेशकों के लिए टैक्स छूट शुरू करने के बाद भारत प्रमुख वैश्विक बॉन्ड सूचकांकों (Global Bond Indices) में शामिल होने के अपने प्रयासों को तेज कर रहा है। इसमें सफल समावेश से बड़े पैमाने पर विदेशी पूंजी प्रवाह होने की उम्मीद है, जिससे रुपये को स्थिर करने और सरकार तथा खुदरा उपभोक्ताओं के लिए उधारी की लागत कम करने में मदद मिल सकती है।
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