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भारतीय इक्विटी बाजार लचीलापन दिखा रहा है क्योंकि विदेशी बिकवाली धीमी हुई है और घरेलू खरीद जारी है
जून में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में अपनी बिकवाली काफी कम कर दी है, जो बाजार की बेहतर भावना का संकेत है। विदेशी पूंजी के इस कम बहिर्वाह ने, घरेलू निवेशकों द्वारा जारी मजबूत खरीद के साथ मिलकर, भारतीय इक्विटी बाजार को महत्वपूर्ण समर्थन और लचीलापन प्रदान किया है।
उभरते बाज़ारों की तुलना में भारत के बाज़ार का प्रीमियम घटा, लेकिन 2021 से अब भी ऊपर
अन्य उभरते बाज़ारों की तुलना में भारतीय शेयर बाज़ार के मूल्यांकन प्रीमियम में उल्लेखनीय कमी आई है। इस नरमी के बावजूद, प्रीमियम 2021 में देखे गए स्तरों से अधिक बना हुआ है। यह घटनाक्रम विश्लेषकों के बीच विदेशी निवेश आकर्षित करने पर इसके प्रभाव को लेकर बहस छेड़ता है, खासकर नई भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच।
₹26 लाख करोड़ वाले ग्लोबल फंड्स अभी भी भारत पर बड़ा दांव लगाने से क्यों कतरा रहे हैं?
भारत की आर्थिक वृद्धि के बावजूद, 100 प्रमुख उभरते बाजार (EM) फंडों में से 70 अभी भी भारतीय शेयरों पर 'अंडरवेट' (underweight) बने हुए हैं। ये वैश्विक निवेशक अन्य देशों की तुलना में ऊंचे स्टॉक वैल्यूएशन के कारण सतर्क हैं, जो स्थानीय पोर्टफोलियो की गति को प्रभावित कर सकता है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व का 'हायर फॉर लॉन्गर' रुख: भारतीय ब्याज दरों में कटौती और FPI प्रवाह में देरी क्यों?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को उच्च स्तर पर बनाए रखने के फैसले से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अपनी ब्याज दर कटौती में देरी होने की उम्मीद है। चूंकि वैश्विक पूंजी अमेरिकी टेक बूम की ओर आकर्षित बनी हुई है, इसलिए भारतीय बाजारों में विदेशी फंड प्रवाह (FPI inflows) में मंदी देखी जा सकती है।
भारतीय सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेशकों की भारी दिलचस्पी: जानें यह आपके डेट फंड रिटर्न को कैसे बढ़ा सकता है
अनुकूल कर नियमों और स्थिर रुपये के कारण भारत की सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में रिकॉर्ड विदेशी पूंजी आ रही है। यह रुझान बढ़ते वैश्विक विश्वास का संकेत है, जिससे ब्याज दरों में कमी और घरेलू डेट फंड निवेशकों के लिए बेहतर लाभ हो सकता है।
RBI के डेट मार्केट सुधारों से आ सकता है $100 बिलियन का विदेशी निवेश: Invesco MF
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए निवेश नियमों को आसान बनाने के निर्णय से सरकारी बॉन्ड में वैश्विक पूंजी की एक बड़ी लहर आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से रुपये में स्थिरता आएगी और भारतीय उपभोक्ताओं व व्यवसायों के लिए ऋण लागत कम हो सकती है।
भारतीय शेयर बाजार की लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए Sebi विदेशी निवेशक नियमों को सरल बनाएगा
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Sebi) विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए KYC मानदंडों में ढील देने और अनुपालन नियमों को सरल बनाने की योजना बना रहा है। इन सुधारों का उद्देश्य अधिक वैश्विक पूंजी को आकर्षित करना और भारत में समग्र निवेश माहौल में सुधार करना है।
रुपये और बॉन्ड बाजार को मजबूती देने के लिए सरकार ने विदेशी निवेशकों के लिए नियमों को किया सरल
भारत सरकार ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए देश में अधिक वैश्विक पूंजी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक सरलीकृत आवेदन प्रक्रिया शुरू की है। इस नियामक बदलाव का लक्ष्य रुपये को स्थिर करना है और अंततः इससे घरेलू खुदरा उधारकर्ताओं और बचतकर्ताओं के लिए बेहतर ब्याज दरें मिल सकती हैं।
कर्जदारों के लिए अच्छी खबर: विदेशी निवेश के चलते सरकारी बॉन्ड यील्ड में 0.10% की गिरावट
नए टैक्स राहत के बाद विदेशी निवेशकों द्वारा खरीदारी बढ़ाने से भारतीय सरकारी बॉन्ड यील्ड में 0.10% की गिरावट आई है। यील्ड में यह गिरावट आमतौर पर होम और कार लोन के लिए कम ब्याज दरों का संकेत देती है, साथ ही यह डेट म्यूचुअल फंड निवेशकों के रिटर्न को भी बढ़ाती है।
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